पिथौरागढ़
By On 9 Mar, 2013 At 12:37 PM | Categorized As | With 0 Comments

pithauragarh5पिथौरागढ़ को ”लिटिल कश्‍मीर’ के नाम से भी जाना जाता है

पिथौरागढ़ को प्रमुख हिल रिजोर्ट के रूप में जाना जाता है। यहां की प्राकृतिक सुन्‍दरता पर्यटकों को अपनी ओर अधिक आकर्षित करती है। पिथौरागढ़ समुद्र तल से 1,851 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पिथौरागढ़ को ”लिटिल कश्‍मीर’  के नाम से भी जाना जाता है। पिथौरागढ़ के पूर्व में नेपाल, पश्चिम में अल्मोड़ा और चमोली (गढ़वाल), दक्षिण में नैनीताल और उत्तर में तिब्बत स्थित है। यह जगह मुख्‍य रूप से सोअर घाटी के लिए जानी जाती है। पिथौरागढ़ चार पर्वतों चंडाक, ध्‍वज, थाल केदार और कुंदर के मध्‍य स्थित है। पिथौरागढ़ का महत्व चन्द राजाओं के समय से रहा है। यह नगर सुन्दर घाटी के बीच बसा है।

पिथौरागढ़ को पहले सोरघाटी के नाम से जाना जाता था। ऐसा माना जाता है कि यहां पर सात सरोवर स्थित थे। धीरे-धीरे इन सरोवरों का पानी सूखता गया। और यह स्‍थान पठार रूप में स्‍थापित हो गया। इस कारण ही इस स्‍थान का नाम पिथौरागढ़ रखा गया। जबकि अधिकांश लोगों का मानना है कि पिथौरागढ राय पिथौरा की राजधानी थी और उन्‍हीं के नाम पर इस जगह का नाम पिथौरागढ़ रखा गया। कुमाऊँ पर होनेवाले आक्रमणों का सामना पिथौरागढ़ ने सुदृढ़ किले की तरह किया है। जिस घाटी में पिथौरागढ़ स्थित है, उसकी लम्बाई ८ किमी. और चौड़ाई १५ किमी.है। रमणीय घाटी का मनोहर नगर पिथौरागढ़ सैलानियों का स्वर्ग है।

क्‍या देखें
बालेश्रवर
- तंकपुर मार्ग पर स्थित पिथौरागढ़ से बालेश्रवर 76 किलोमीटर की दूरी पर स्‍िथत है। यह मंदिर पर्वत पर  स्‍िथत है। इस मंदिर की वास्‍तुकला इस मंदिर की खूबसूरती को ओर अधिक बढ़ाती है। इस मंदिर का निर्माण चंद राजाओं ने आठवीं शताब्‍दी में करवाया था।

नारायण आश्रम- इस आश्रम की स्‍थापना 1936 में नारायण स्‍वामी ने की थी। यह आश्रम एक धार्मिक स्‍थान है। यहां स्‍थानीय बच्‍चे शिक्षा प्राप्‍त करने के लिए भी आते हैं। इसके साथ ही नारायण आश्रम स्‍थानीय निवासियों की सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों में भी मदद करता है। यह आश्रम बहुत ही खूबसूरत है और आश्रम के चारों ओर रंग-बिरंगे फूल इसकी खूबसूरती को ओर अधिक बढ़ाते हैं। आश्रम का वातावरण बहुत ही शान्तिपूर्ण है। इसके अलावा आश्रम में यात्रियों एवं पर्यटकों के लिए मेडिटेशन रूम और समाधि स्‍थल की सुविधा भी उपलब्‍ध है। प्रत्‍येक वर्ष इस आश्रम में काफी संख्‍या में विदेशी पर्यटक घूमने के लिए यहां आया करते हैं।

ध्‍वज मंदिर- ध्‍वज मंदिर समुद्र तल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पिथौरागढ़ से इस स्‍थान की दूरी 15 किलोमीटर है। इसके अतिरिक्‍त आगे की यात्रा पैदल ही करनी पड़ती है। जो करीबन 4.5 किलोमीटर है। यह मंदिर भगवान शिव और मां जयन्‍ती को समर्पित है। इस मंदिर से आप हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों का खूबसूरत नजारा भी देख सकते हैं। इस मंदिर की यात्रा भले ही थोड़ी मुश्किल है लेकिन फिर भी भक्‍तजनों की भीड़ यहां हमेशा ही रहती है।

थाल केदार- थाल केदार एक अन्‍य महत्‍वपूर्ण धार्मिक स्‍थल है। यह स्‍थान प्रमुख रूप से अपनी प्राकृतिक सुन्‍दरता के लिए प्रसिद्ध है। यहां भक्‍तों की सबसे अधिक भीड़ शिवरात्रि के अवसर पर होती है। यह स्‍थान पिथौरागढ़ से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

कपिलेश्‍वर महादेव- कपिलेश्‍वर महादेव मंदिर शहर से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर एक गुफा के आकार में है। य‍ह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसलिए इस मंदिर का नाम कपिलेश्‍वर महादेव के नाम रखा गया है।

एस्‍कोट अभ्‍यारण्‍य- एस्‍कोट अभ्‍यारण्‍य पिथौरागढ़ जिले में स्थित है। इस अभ्‍यारण के चारों ओर पर्वत और जंगल है। एस्‍कोट अभ्‍यारण में आपको अनेक जंगली जानवर जैसे भालू, हिरण, चीता, तेंदुआ, काकर , मोर  और पक्षियों की कई प्रजातियां देखने को मिल सकती है। इस अभ्‍यारण में कई देसी एंव विदेशी वैज्ञ‍ानिक रिसर्च के लिए भी आते हैं।
एस्‍कोट अभ्‍यारण्‍य से सम्‍बन्धित अधिक जानकारी के लिए सम्‍पर्क करें-
दॉ डिविजनल फोरेस्‍ट ऑफिसर
एस्‍कोट अभ्‍यारण्‍य
पिथौरागढ़, जिला-पिथौरागढ़ (उत्तराखंड)

गंगोलीहट- गंगोलीहट प्रमुख धार्मिक स्‍थलों में से एक है। यह स्‍थान अपने परम्‍परागत परम्‍पराओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। पिथौरागढ़ से इस स्‍थान की दूरी लगभग 77 किलोमीटर है। यह स्‍थान खासतौर पर प्रसिद्ध महाकाली मंदिर के लिए जाना जाता है। यहां शंकराचार्य ने स्‍वयं शक्ति पीठ स्‍थापित की थी। नवरात्रों के अवसर पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर लाखों की संख्‍या में भक्‍तगण पूरी श्रद्धा के साथ यहां पूजा-अर्चना करते हैं। गंगोलीहट से 2 किलोमीटर की दूरी पर ही मनकेश्रवर मंदिर भी स्थित है।

कैसे जाएं
हवाई अड्डा
: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा नैनी सैनी (पिथौरागढ़)है। जो पिथौरागढ़ से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्‍टेशन तंकपुर है। यह पिथौरागढ़ से 151 किलोमी. की दूरी पर स्थित है।
सड़क मार्ग: अल्‍मोड़ा, नैनीताल, हल्‍दवानी, दिल्‍ली और तंकपुर से रोजाना समय-समय पर पिथौरागढ़ के लिए बसें चलती है।

पिथौरागढ़ पर्यटन कार्यालय
पिथौरागढ़
दूरभाष: 05964-225527
वेबसाइट: http://www.pithoragarh.nic.in

एक नजर में
क्षेत्रफल
: 8856 वर्ग किलोमी.
ऊंचाई: समुद्र तल से 1650 मी.
भाषा: हिन्‍दी, कुंमाऊंनी, अंग्रेजी
एसटीडी कोड: 05964
घूमने का समय: अप्रैल से जून और सितम्‍बर से अक्‍टूबर

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